जलीकटी
गोत्र के भगवान!
(पृष्ठ 1 से आगे)
महिला आयोग की अध्यक्षा सुश्री गिरिजा व्यास ने मीडीया से अपील की है कि 'ऑनर किलिंग' जैसे नामों का इस्तेमाल
करके ऐसे हत्याकांडों को महिमा-मंडित ना करें और इसका कुछ और नाम निकालें. सही है. मगर ऐसे जघन्य कृत का
कोई नाम ढूंदना भी तो आसान काम नहीं! कई नाम आते हैं मन में, मगर सब छोटे पड़ जाते हैं. अगर
'फेक ऑनर किलिंग' नाम रखा जाए तो उन जैसे लोगों को 'fake' का मतलब भी साथ में समझाना पड़ेगा.
खैर उसमें तो समय नहीं लगेगा मगर ये नाम भी कुछ ढीला है.
नाम तो ऐसा हो जिसमें करने वाले की 'बेवक़ूफी' या 'दरिंदगी' सॉफ झलके. है कोई दिमाग़ में ऐसा?
फूलिश किलिंग या मूर्खतापूर्ण हत्याकांड कैसा रहेगा? जिस समाज में 'इज़्ज़त' बनाने के लिए ऐसा काम किया था
अगर वही समाज मीडीया में उनके बारे में ऐसे अल्फ़ाज़ सुनेगा तो झूठी इज़्ज़त की मूर्खतापूर्ण दुनिया में जीने वाले
कुछ तो झिझकेंगे ऐसा करने से पहले!
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वैसे कभी किसी ने यह सोचा है कि अपने देश की यह भीड़ इतनी खूनी, इतनी दरिंदगी वाली कैसे हो गयी?
Lack of education. एजुकेशन से मेरा मतलब स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई से नहीं है.
कोर्स की किताबें 'राढ' कर, सैंपल प्रश्न पत्र रट कर क्लासें पास कर लेने को एजुकेशन नहीं कहते.
असली एजुकेशन यानी शिक्षित करने का ज़िम्मा जिन लोगों पर है, जब वही फेल होने लग जाएँ तो गावों में
पले-बढ़े लोगों को क्या दोष दें? क्या है हमारी शिक्षा प्रणाली? चंद कोर्स की किताबें, वो भी जो ढंग से पढ़ाई
नहीं जातीं? समाज जिनको मानता है वही जब गँवारों की भाषा बोलने लग जाएँ तो किसकी सुनेगा कोई और
किसकी मानेगा कोई?
वक़्त की ज़रूरत है अपने देशवासियों को देश के बुनियादी क़ानून की जानकारी देने की. इस देश का क़ानून
इतना ज़्यादा मानवतावादी और इतनी गहरी सोच और ठोस आधार पर बनाया गया है कि अगर इसका पालन
सही ढंग से हो तो कहीं कोई मानवाधिकार का हनन हो ही नहीं सकता.अँग्रेज़ भले ही देश का कितना ही नुकसान
कर गये हों, संविधान का आधार तो बेहतरीन ही देकर गये हैं. उसके उपर से बाबा अंबेडकर जैसे विद्वानों ने
उसे भारतीय आवश्यकताओं और मर्यादाओं के आधार पर ढाल कर एक ऐसी बेहतरीन सूरत पैदा की है कि
जिसका जवाब शायद दुनिया में कहीं ना हो. आज आवश्यकता है उस संविधान की बुनियादी जानकारी को
देश के कोने-कोने के गावों तक पहुँचाना. मगर इस देश में तो ज़्यादातर जगह पुलिस तक को क़ानून और
संविधान की बुनियाद नहीं मालूम होती. फटाफट गिरफ्तार कर लेते हैं उन लोगों को जिन्होने बालिग होकर
अपनी मर्ज़ी से शादी कर ली है, सिर्फ़ इसलिए कि उनके खिलाफ उनके माँ-बाप की शिकायत है!
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